
मथुरा, 02 सितम्बर । सात सितम्बर को लाला कन्हैया का 5250 वां जन्मोत्सव समूचे बृज में धूमधाम और हर्षोल्लास से मानने की तैयारियां प्रारभ हो गई है। जन्मोत्सव का मुख्य आयोजन श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर होगा। इस बार रजत कमल पुष्प में श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव होगा। श्री ठाकुर जी का जन्म महाभिषेक रात्रि 12.20 बजे से 12.40 बजे तक जन्म स्थान के अध्यक्ष मंहत नृत्यगोपाल दास के दिव्य सान्निध्य में संपन्न होगा।
यह जानकारी शनिवार शाम श्रीकृष्ण जन्म स्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण के 5250 वें जन्मोत्सव के अवसर पर जन्मस्थान की साज-सज्जा, ठाकुरजी की पोशाक, श्रंगार नयनाभिराम होंगी। जन्म भूमि के अन्दर एवं परिसर के बाहर से श्रद्धालुगण जिस दिशा से भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के दर्शन करेंगे।
सात सितम्बर गुरूवार को प्रातः दिव्य शहनाई एवं नगाड़ों के सुमधुर वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन प्रातः 5.30 बजे से होंगे। प्रातः 8 बजे भगवान का दिव्य पंचामृत अभिषेक पुष्पार्चन होगा। पूर्वाह्न 10 बजे भव्य पुष्पांजलि कार्यक्रम श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार के श्रीचरणों में भागवत भवन के दिव्य प्रांगण में आयोजित किया जायेगा। बृज के उत्कृष्ट गायक इस अवसर पर ठाकुरजी के संमुख दिव्य भजन गायन की प्रस्तुति देंगे।
जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात्रि 11 बजे श्रीगणेश नवग्रह आदि पूजन से आरंभ होगा। तदोपरांत 1008 कमल पुष्पों से ठाकुरजी का सहस्त्रार्चन करते हुए आव्हान किया जायेगा। रात्रि 12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ संपूर्ण मंदिर परिसर में बज उठेंगे ढोल, झांझ, मंजीरे, मृदंग साथ हरिबोल के साथ नाच उठेंगे असंख्य भक्तजन, संत एवं भगवान के जन्म की महाआरती शुरू होगी जो रात्रि 12.05 बजे तक चलेगी। ढोल एवं मृदंग अभिषेक स्थल पर तो बजेंगे ही साथ ही सम्पूर्ण मंदिर परिसर में स्थान-स्थान पर भी इनका वादन होगा। हर साल की भांति प्रातः से ही श्रद्धालुओं को मेवे नारियल के लड्डू मेवे पाग कतली का वितरण किया जायेगा।
सचिव कपिल शर्मा के अनुसार इस आलौकिक आयोजन का समापन 8 सितम्बर को भव्य नंदोत्सव- बधाई गायन के साथ होगा। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के सुगम प्रवेश को दृष्टिगत रखते हुए लाउडस्पीकर के माध्यम से निर्देश दिये जायेंगे, साथ ही बेरिकेटिंग इस प्रकार की जा रही है जिससे कि श्रद्धालू कम से कम समय में दर्शन प्राप्त कर सकें। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को प्रवेश गोविंद नगर द्वार( गेट संख्या 3) से होगा एवं निकास मुख्य द्वार (गेट संख्या 1) से होगा।
श्रीकृष्ण जन्म महाभिषेक कार्यक्रम
गणपति एवं नवग्रह स्थापना पूजन आदि रात्रि 11ः00 बजे से, सहस्त्रार्चन (कमल पुश्प एवं तुलसीदल से) रात्रि 11ः55 बजे तक, प्राकट्य दर्शन हेतु पट बन्द 11ः59 बजे, प्राकट्य दर्शन रात्रि 12ः00 बजे से 12ः05 बजे तक, आरती, महाअभिषेक (कामधेनु) ठाकुरजी का जन्म रात्रि 12ः05 बजे से 12ः20 बजे तक, महाअभिषेक रात्रि 12ः20 बजे से 12ः40 बजे तक श्रंगार आरती शयन आरती रात्रि 12ः40 बजे से 12ः50 बजेतक, रात्रि 1ः25 बजे से 1ः30 बजेतक दर्शन होंगे।
स्वर्ण मंडित रजत से निर्मित कामधेनु करेंगी कन्हैया का महाभिषेक
भगवान का प्रथम जन्माभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत से निर्मित कामधेनु स्वरूपा गौमाता करेंगी। शास्त्रीय मान्यता है कि गौमाता में स्वयं 33 कोटि देवतागण वास करते हैं। ठाकुरजी के जन्माभिषेक कामधेनु स्वरूपा गऊ द्वारा रात्रि 12ः05 बजे से रात्रि 12ः20 बजे तक किया जायेगा। इसके बाद रजत कमल पुष्प में विराजित ठाकुरजी का जन्म महाभिषेक रात्रि 12ः20 बजे से 12ः40 बजे तक होगा। ठाकुरजी की श्रृंगार आरती रात्रि 12ः40 बजे से 12ः50 बजे तक होगी। जन्मस्थान में श्रद्धालुओं का प्रवेश रात्रि 1ः30 बजे तक होगा।

