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उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही सम्पन्न हुआ सूर्योपासना का महापर्व

अररिया, 20 नवम्बर ।

लोक आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ के चौथे दिन सोमवार को जिले में बहने वाली परमान,बकरा, रतुआ नदी सहित विभिन्न तालाबों, पोखरों और नहर में खड़े होकर छतव्रतियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया।

उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत की समाप्ति हुई।घाट पर छठव्रतियों ने प्रसाद का वितरण किया और सुहागिन महिला एक दूसरे को सिंदूर लगाकर सदा सुहागन बने रहने की कामना की।वहीं छठव्रतियों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की भी होड़ रही।अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने त्रिशुलिया घाट पर भगवान भास्कर को अर्घ्य प्रदान किया गया।

सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने वोट पर घाटों का निरीक्षण किया और हाथ जोड़कर सभी छठव्रतियों का अभिवादन किया।

छठ को लेकर जिला प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए।साफ सफाई के साथ घाटों पर रोशनी की व्यवस्था की गई।वहीं नगर परिषद प्रशासन की ओर से छठ को लेकर विशेष सफाई के तहत पूरे शहर में सफाई की गई।शहर के सड़क के दोनों ओर चूना और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया।

शहर में रोशनी की व्यवस्था की गई।जिससे अहले सुबह छठव्रतियों को घाट पर जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।घाट पर जिला प्रशासन की ओर से छठव्रतियों के वस्त्र बदलने के लिए चेंजिंग रूम,भीड़ पर नियंत्रण के लिए वॉच टावर का निर्माण के साथ घाटों पर गहरे पानी को लेकर बांस की बेरेकेडिंग की गई।इसके अलावे किसी तरह की अनहोनी घटना से निबटने के लिए घाटों पर एसडीआरएफ के जवानों के अलावे गोताखोर की तैनाती रही।

प्रकृति को समर्पित इस महापर्व में छठव्रतियों ने पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर की अराधना की और रविवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। छ्ठव्रती कच्चे बांस के बने सूप में नारियल, डाब नींबू,फल- फूल सहित अन्य प्रकृति से प्रदत समानों के साथ डुबकी लगाते हुए सुख शांति और समृद्धि को छठी मैया से कामना की।वहीं विभिन्न घाटों पर पूजा समिति की ओर से स्थापित भगवान भास्कर की प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी रही।

घाटों पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बिहार पुलिस के जवान और अधिकारी के साथ पूजा समिति के सदस्य और स्काउट गाइड के जवान मुस्तैदी से लगे रहे।हालांकि घाट पर बच्चों की ओर से पटाखे और आतिशबाजी जमकर की गई।घाट सहित पूरा शहर छठी मैया के लोक गीतों से गुंजायमान रहा।

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