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संस्कृत विश्वविद्यालय में पंडित परिषद का निर्णय: तीस अगस्त रात नौ बजकर दो मिनट पर बांधे राखी

जयपुर, 24 अगस्त । श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन पर्व को लेकर पंचांगों में गणितीय मानों की भिन्नता के कारण तीस या इकतीस अगस्त को लेकर समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे की अध्यक्षता में विद्वानों की बैठक हुई।

विश्वविद्यालय प्रवक्ता शास्त्री कोसलेंद्रदास ने बताया कि वैदिक सनातन धर्म के अंतर्गत किसी भी व्रत या पर्व का निर्णय आकाशीय ग्रह पिंडों की गति स्थिति से प्राप्त मानों की परिगणना करते हुए धर्मशास्त्र में निर्दिष्ट व्यवस्था के तहत होता है। श्रावण की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला उपाकर्म एवं रक्षाबंधन महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष पूर्णिमा का मान 30 अगस्त को पूर्वाह्न से आरंभ होकर 31 अगस्त तक रहेगा। 31 अगस्त को 6 घटी से न्यून होने के कारण समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। लोग अपने-अपने तर्कों से 31 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने का निर्णय दे रहे हैं, जो धर्मशास्त्र के आधार पर ठीक नहीं है। अतः समाज में व्याप्त भ्रम के निवारण के लिए विद्वानों ने राजस्थान में प्रचलित विविध पंचांगों में वर्णित पूर्णिमा के मानों का परीक्षण किया। इसके अनुसार तीस तारीख को प्रातः दस बजकर उनसठ मिनट के बाद उपाकर्म तथा रात्रि नौ बजकर दो मिनट के बाद रक्षाबंधन करना शास्त्रसम्मत है। कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे की अध्यक्षता में धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु आदि ग्रंथों के रक्षाबंधन एवं उपाकर्म सम्बन्धी उद्धरणों का उल्लेख करते हुए निर्णय लिया गया है।

कुलपति प्रो. दुबे ने कहा कि यदि पूर्णिमा का मान दो दिन हो रहा हो तथा प्रथम दिन सूर्योदय के एकादि घटी के बाद पूर्णिमा का आरंभ होकर द्वितीय दिन पूर्णिमा 6 घटी से कम है तो पूर्व दिन भद्रा से रहित काल में रक्षाबंधन करना चाहिए। पूर्णिमा यदि प्रतिपदा से युक्त होकर 6 घटी से न्यून हो तो उसमें रक्षाबंधन नहीं करना चाहिए। इस वर्ष 31 अगस्त को पूर्णिमा 6 घटी से कम है तथा 30 अगस्त को नौ बजकर दो मिनट तक भद्रा है। अतः 30 अगस्त को ही रात्रि में भद्रा के बाद रक्षाबंधन करना शास्त्रसम्मत है क्योंकि रात्रिकाल में भी रक्षाबंधन करने का विधान है।

प्रो. दुबे ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा को उपाकर्म भी होता है। शुक्ल यजुर्वेदीय लोगों को श्रावणी उपाकर्म 30 अगस्त को करना चाहिए। उपाकर्म में भद्रा दोष नहीं लगता। अत: 30 अगस्त को ही प्रातः दस बजकर उनसठ के बाद उपाकर्म तथा रात्रि नौ बजकर दो मिनट के बाद रक्षाबंधन करना शास्त्रसम्मत है। बैठक में व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ. राजधर मिश्र, शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. माताप्रसाद शर्मा, ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. कैलाश शर्मा, साहित्य विभागाध्यक्ष डॉ. मधुबाला शर्मा, दर्शन विभागाध्यक्ष शास्त्री कोसलेंद्रदास और वेद विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र शर्मा सहित शामिल हुए।

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