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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को भोपाल प्रवास पर, “उत्कर्ष” और “उन्मेष” उत्सव का करेंगी शुभारंभ

भोपाल, 2 अगस्त । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को मध्य प्रदेश के एक दिवसीय प्रवास पर भोपाल आ रही हैं। वह यहां साहित्य अकादमी के एशिया के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मेलन में “उत्कर्ष” और “उन्मेष” उत्सव का शुभारंभ करेंगी। यह जानकारी बुधवार को प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने दी। कार्यक्रम की सभी तैयारियां लगभग पूर्ण हो चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी और साहित्य अकादमी द्वारा संस्कृति विभाग मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से भोपाल में पहली बार तीन से पांच अगस्त तक भारत की लोक एवं जनजाति अभिव्यक्तियों के राष्ट्रीय उत्सव “उत्कर्ष” एवं “उन्मेष” का आयोजन हो रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को सुबह 11:30 बजे भोपाल में रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में इस उत्सव का शुभारंभ करेंगी। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहेंगे।

उन्होंने बताया कि उत्कर्ष उत्सव में देश के 36 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 800 कलाकार लोक एवं जनजातीय प्रदर्शन कलाओं की सतरंगी छटा बिखेरेंगे। उत्सव का प्रसारण संगीत नाटक अकादमी के फेसबुक और यूट्यूब चैनल सहित संस्कृति विभाग के फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा।

उत्कर्ष में शाम पांच बजे से होंगी नृत्यों की प्रस्तुतियां

प्रमुख सचिव शुक्ला ने बताया कि उत्कर्ष उत्सव में शाम पांच बजे से रवीन्द्र भवन के सभागार में भारत के लोक-नृत्य और जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें लेह एवं लद्दाख का जबरो नृत्य, नागालैंड का सुमी वार, गोवा का समय, सिक्किम का सिंधी छम, मध्य प्रदेश का राई एवं नरेरी, मेघालय का बांग्ला, महाराष्ट्र का लावणी, असम का बिहू, ओडिशा का सिंगारी, झारखंड का पाईका और आंध्र प्रदेश के टप्पेटा गुल्लू नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।

दूसरे दिन शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश का आजी लामू नृत्य, हिमाचल प्रदेश का सिरमौरी नाटी, छत्तीसगढ़ का पंथी, राजस्थान का कालबेलिया, असम का तिवा, हरियाणा का फाग, उत्तर प्रदेश का मयूर रास, झारखंड का नागपुरी झूमुर, मणिपुर का ढोल चोलम एवं थांग टा, तमिलनाडु का करगट्टम, पश्चिम बंगाल का नटुवा, कर्नाटक का पूजा कुनिथा और गुजरात का मणीयारो रास नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।

उत्सव के अंतिम दिन पांच अगस्त को कश्मीर का रौफ नृत्य, सिक्किम का सोराठी, बिहार का झिझिया, त्रिपुरा का होजागिरी, छत्तीसगढ़ का गौड़ मारिया, केरला का पुलकली, उत्तराखंड का छपेली, ओडिशा का गोटीपुआ, पंजाब का भांगड़ा, पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छऊ, तेलंगाना का ओग्गू डोलू और मध्य प्रदेश के गुदुम बाजा नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि उन्मेष उत्सव एशिया का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मेलन है। इसमें बहुभाषी कविता पाठ, लेखन पाठ, आदिवासी कवि सम्मेलन, साहित्य के विषयों पर परिचर्चा, आजादी का अमृत महोत्सव पर कविता पाठ और साहित्य के उत्थान संबंधी विभिन्न विषय पर प्रबुद्धजन द्वारा विमर्श किया जाएगा। साथ ही “पुस्तक मेला” में साहित्य अकादमी और अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें बिक्री के लिए सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। उत्सव के दौरान साहित्य अकादमी द्वारा प्रख्यात लेखकों पर बनी डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जायेगी।

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