
पीएम केयर्स फंड को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 15 सितंबर को
नई दिल्ली, 13 जुलाई । दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएम केयर्स फंड को सरकारी फंड घोषित करने की मांग पर सुनवाई टाल दी है। सुनवाई हाई कोर्ट का रोस्टर बदलने की वजह से टाली गई। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। आज ये मामला चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की बेंच के समक्ष लिस्टेड था। पहले ये मामला चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच सुन रही थी। ऐसा हाई कोर्ट के रोस्टर बदलने की वजह से हुआ।
31 जनवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि पीएम केयर्स फंड सरकारी फंड नहीं है। पीएम केयर्स फंड आरटीआई के तहत सार्वजनिक प्राधिकार की परिभाषा में नहीं आता है। हलफनामे में कहा गया है कि पीएम केयर्स फंड पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रुप में गठित किया गया है और इसका गठन संविधान के तहत या संसद और विधानसभा की ओर से नहीं किया गया है। पीएम केयर्स फंड पर न तो केंद्र सरकार का नियंत्रण है और न ही किसी राज्य सरकार का। पीएमओ ने कहा है कि पीएम केयर्स फंड स्वेच्छा से दान करने वाले लोगों और संस्थाओं से धन लेता है और यह किसी बजटीय प्रावधान या लोक उपक्रम के बैलेंस शीट से आने वाले धन को स्वीकार नहीं करता है।
सितंबर 2022 में हाई कोर्ट ने पीएम केयर्स फंड को सरकारी फंड घोषित करने की मांग पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को समय दिया था। जुलाई 2022 में हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव को निर्देश दिया था कि वो इस मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। कोर्ट ने इस मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से एक पेज का हलफनामा दाखिल करने पर नाराजगी जताई थी।
11 अक्टूबर, 2021 को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि पीएम केयर्स फंड में आने वाला धन भारत सरकार के समेकित खाते में नहीं आता है। इसलिए ये कोई सरकारी फंड नहीं है। कोष में पारदर्शिता बनाये रखने के लिए इस ट्रस्ट को मिले धन और उसका सारा विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाता है।
17 अगस्त, 2021 को कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया था। याचिका सम्यक गंगवाल ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील श्याम दीवान ने सार्वजनिक और स्थायी फंड में अस्पष्टता पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा था कि याचिकाकर्ता पीएम केयर्स फंड के दुरुपयोग के आरोप नहीं लगा रहा है लेकिन भविष्य में भ्रष्टाचार या दुरुपयोग के आरोपों से बचने के लिए ये स्पष्टता जरूरी है।

