
भोपाल, 12 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उन्होंने सामाजिक बुराइयों को दूर किया और समाज को जागृत किया। आज भारत उनके बताए मार्ग पर चल कर गुलामी की मानसिकता से मुक्ति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। सागर में आज समरसता का महासागर उमड़ा है। संत रविदास स्मारक एवं कला संग्रहालय की आधारशिला रखी गई है। जब यह एक-डेढ़ वर्ष में पूरा हो जायेगा, तब इसका लोकार्पण करने अवश्य आऊँगा। इसके साथ ही आज मध्य प्रदेश से सामाजिक समरसता के नये युग की शुरुआत हो रही है।
प्रधानमंत्री शनिवार को सागर जिले के बड़तूमा में संत रविदास के सौ करोड़ की लागत से बनने वाले स्मारक और कला संग्रहालय के भूमिपूजन और शिलान्यास के बाद ढाना में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस मौके पर कोटा-बीना रेल लाइन दोहरीकरण का लोकार्पण किया। उन्होंने 1580 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की दो सड़क परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संत रविदास जी की शिक्षा इस स्मारक स्थल के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरणा देंगी। उन्होंने मध्य प्रदेश के 20 हजार ग्रामों और करीब 300 नदियों की मिट्टी विभिन्न यात्राओं के माध्यम से सागर तक लाने के कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे लाखों परिवारों ने एक-एक मुट्ठी अनाज देकर समरसता के भाव को बढ़ाया है। वे इस स्मारक का हिस्सा बनेंगी। पांच समरसता यात्राओं का समापन आज हुआ है। ये यात्राएं यहां खत्म नहीं होंगी, यहां से एक नए युग का प्रारंभ होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रेरणा और प्रगति जुड़ते हैं तो नए युग की नींव पड़ती है। मध्य प्रदेश इन कार्यों के लिए प्रशंसा का पात्र है। समरसता के भाव से जब कार्य होता है तो समाज से संत निकलते हैं। संत रविदास भी ऐसे संत और महात्मा थे। उन्होंने उस कालखण्ड में जन्म लिया जब मुगलों का शासन था। समाज अत्याचार से जूझ रहा था। तब संत रविदास समाज का जागरण कर रहे थे। वे बुराइयों से लड़ना सिखा रहे थे। वे जात-पात के भेद के फेर में उलझे लोगों को मानवता का रास्ता दिखा रहे थे। वे देश की आत्मा को झकझोर रहे थे। तब समाज में बहुत पाबंदियां थीं। संत रविदास ने पराधीनता को पाप माना था। उन्होंने समाज को हौसला दिया। इसी समरसता के भाव से शिवाजी महाराज ने हिन्दवी साम्राज्य की नींव रखी। फिर आगे चलकर यही भाव स्वतंत्रता संग्राम का आधार भी बना।
उन्होंने संत रविदास के अनेक दोहों का उल्लेख करते हुए कहा कि संत रविदास चाहते थे कि समाज में कोई भूखा नहीं रहे। हम सब छोटे-बड़े के भाव से ऊपर उठकर मिलकर साथ रहें। रविदास के इस विचार से प्रेरित होकर हम अमृतकाल में गरीबी और भूख से लोगों को मुक्त करने का कार्य कर रहे हैं। कोरोना काल में हमने समाज के वंचित और जनजातीय वर्ग के लिए तमाम आशंकाओं से उठ कर 80 करोड़ भारतीयों के लिए गरीब कल्याण अन्न योजना प्रारंभ की। इसकी पूरी दुनिया ने तारीफ की।
प्रधानमंत्री ने विभिन्न योजनाओं को जानकारी दी, जिनसे देश के लाखों लोक लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर गरीब के सिर पर छत हो, इसके लिए आवास योजना का लाभ देने और बिजली पानी के नि:शुल्क कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। वंचित समाज के लोग इस योजना से अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं।
संत रविदास के सम्मान में देश और मध्य प्रदेश में संस्थाओं के नामकरण
प्रधानमंत्री ने कहा कि बनारस में जहां संत रविदास की जन्म स्थली के सौन्दर्यीकरण का कार्य किया गया है, वहीं मध्य प्रदेश में भी इस दिशा में अच्छा कार्य हो रहा है। भोपाल में ग्लोबल स्किल पार्क गोविंदपुरा का नामकरण संत रविदास जी के नाम पर किया गया है। सागर में संत रविदास के जीवन और शिक्षा को प्रदर्शित करने वाले संग्रहालय का निर्माण भी इस श्रृंखला में महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश में रानी कमलापति के नाम पर रेलवे स्टेशन और टंट्या मामा के नाम पर पातालपानी रेलवे स्टेशन का नामकरण किया गया। इसी तरह बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर से जुड़े पंच तीर्थों का विकास हो रहा है। संत रविदास सहित बलिदानियों और महात्माओं की शिक्षाएं इन स्थानों के माध्यम से समाज को एकजुट रखेंगी। सरकार ने ऐसे महापुरुषों के सम्मान का पूरा ध्यान रखा है।
सागर के लाखा बंजारे का विशेष उल्लेख
प्रधानमंत्री ने सागर की विशाल झील के निर्माता लाखा बंजारे के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर की पहचान लाखा बंजारे द्वारा 400 एकड़ इलाके में निर्मित लाखा बंजारा झील से है। लाखा बंजारे ने पानी की अहमियत को समझा और झील का निर्माण करवाया। सरकार ने लाखा बंजारे की परम्परा को निभाते हुए आजादी के अमृतकाल में हर जिले में 75 अमृत सरोवरों का निर्माण करवा कर उन्हें सामाजिक समरसता का केंद्र बनाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के माध्यम से घरों तक पाइप लाइन से पानी पहुंचाया गया है। आज सागर शहर समरसता का सागर बन गया है।

