
इस्लामाबाद, 27 जुलाई । पाकिस्तान में अब देश की सुरक्षा व सेना से जुड़ी जानकारी का खुलासा करने वाले व्यक्ति के लिए पांच साल तक जेल का प्रावधान कर दिया गया है। इस आशय का विधेयक गुरुवार को पाकिस्तान की सीनेट ने पारित कर दिया।
पाकिस्तान की मौजूदा सरकार इस समय गुप्त दस्तावेज के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर मुकदमा चलाने के प्रयास कर रही है। इसी बीच गुरुवार को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सीनेच के समक्ष पाकिस्तान सेना अधिनियम, 1952 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया। सीनेट ने इस विधेयक को पास कर दिया। विधेयक में कहा गया है कि जो व्यक्ति पाकिस्तान की सुरक्षा और लाभ के लिए आधिकारिक क्षमता में प्राप्त जानकारी का अनधिकृत खुलासा करेगा उसे पांच साल तक के कठोर कारावास की सजा दी जाएगी। इसमें कहा गया है कि सेना प्रमुख या अधिकृत अधिकारी की अनुमति से खुलासा करने वाले व्यक्ति को दंडित नहीं किया जाएगा।
विधेयक में यह भी कहा गया है कि जो कोई भी देश और पाकिस्तानी सेना के हितों के खिलाफ जानकारी का खुलासा करेगा, उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और सेना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि कोई व्यक्ति अपनी सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र या सेवा से बर्खास्तगी के दो साल बाद तक किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेगा। न ही संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात किसी व्यक्ति को अपनी सेवा के बाद पांच साल तक राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने की अनुमति होगी। कोई भी व्यक्ति राजनीतिक गतिविधियों को छोड़कर अन्य धाराओं के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है, तो उसे दो साल तक की सजा हो सकती है।
नए कानून के मुताबिक सेना अधिनियम के किसी इलेक्ट्रॉनिक अपराध में शामिल किसी व्यक्ति का मकदस यदि पाकिस्तान सेना को बदनाम करना है, तो उसके खिलाफ पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक अपराध अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति सशस्त्र बलों के खिलाफ नफरत फैलाता या उन्हें बदनाम करता पाया गया तो उसे जुर्माना और दो साल तक की कैद हो सकती है। सेना अधिनियम में संशोधन के विधेयक के अलावा, छावनी अधिनियम, 1924 और रक्षा आवास प्राधिकरण इस्लामाबाद अधिनियम, 2013 में संशोधन के लिए दो अन्य विधेयक भी सीनेट द्वारा पारित किए गए।

