Skip to main content
Breaking News :
उत्तरकाशी सुरंग से निकाले गए प्रत्येक मजदूर को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद देगी राज्य सरकार राजस्थान में सुबह 9 बजे तक 9.77 फीसदी मतदान दर्ज किया गया पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुए आत्मघाती विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़कर 44 हुई मणिपुर वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली गिरावट के साथ खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 182 अंक लुढ़का महाराष्ट्र में भारी बारिश के कारण मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट सच्चे हिंदू नहीं हो सकते राहुल गांधी: गिरिराज सिंह राजस्थान सरकार के बर्खास्त मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा बोले- मंत्रियों विधायकों ने मारा, लाल डायरी छीन ली | उज्जैन: भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, आधी रात से लगी लम्बी कतारें | केंद्रीय गृहमंत्री ने बाढ़ की स्थिति को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री से की बात |

नेपाल में दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ जांच के आदेश, चार पूर्व मंत्रियों के खिलाफ अरेस्ट वारंट

काठमांडू, 07 अगस्त । नेपाल के चर्चित ललिता निवास जमीन घोटाले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इस जमीन घोटाले में अब तक पकड़े गए अभियुक्तों की जमानत पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दो पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल और डॉ. बाबूराम भट्टराई की भूमिका की भी जांच की जाए।

सुप्रीम कोर्ट के दो जजों के बेंच ने पुलिस को आदेश जारी किया है कि इस घोटाले में न सिर्फ दो पूर्व प्रधानमंत्री बल्कि उनके कार्यकाल में रहे सरकार के मुख्य सचिव और विभागीय मंत्रियों की भूमिका की भी जांच की जाए। इसी बीच इस जमीन घोटाले में शामिल होने के आरोप में जिन पूर्व मंत्रियों पर मुकदमा चल रहा है उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हो गया है।

जमीन घोटाले की जांच कर रही केन्द्रीय अनुसंधान ब्यूरो (सीआईबी) ने पूर्व उपप्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री समेत रहे विजय कुमार गच्छदार, पूर्व मंत्रियों डम्बर बहादुर श्रेष्ठ, चन्द्रदेव जोशी और संजय कुमार साह के खिलाफ जिला अदालत काठमांडू से अरेस्ट वारंट जारी करवा लिया है।

ललिता निवास जमीन घोटाला एक सोची समझी नीतिगत भ्रष्टाचार का मामला है जिसमें कुछ व्यापारिक लोगों के निजी स्वार्थ में पूरा का पूरा सरकारी तंत्र सम्मिलित था। इतना ही इस पूरे जमीन घोटाले को अंजाम देने के लिए कई मंत्रालयों के सचिव से लेकर मंत्री तक और मुख्य सचिव से लेकर प्रधानमंत्री तक शामिल हैं।

काठमांडू शहर के बीचों बीच प्रधानमंत्री निवास के आसपास की करीब 1.5 लाख स्क्वायर मीटर सरकारी जमीन को फर्जी दावेदार बनाकर कैबिनेट के फैसले द्वारा पहले उसका निजीकरण किया गया और बाद में महंगे दामों में विभिन्न व्यापारिक घरानों को बेच दिया गया। चूंकि यह फैसला दो अलग-अलग सरकारों की कैबिनेट से हुआ इसलिए यह ऐसा भ्रष्टाचार है जिसमें पूरा सरकारी तंत्र, विभाग, मंत्रालय, मंत्री, सचिव, मुख्य सचिव और प्रधानमंत्री तक की सहभागिता है।

नेपाल के सबसे बडे घोटालों में एक माने जाने वाले ललिता निवास जमीन घोटाला कांड में अब तक पूर्व उपप्रधानमंत्री से लेकर कई मंत्री, सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारी तथा बडे व्यापारिक घराने के लोगों के ही खिलाफ विशेष अदालत में मुकदमा चल ही रहा है।

इस बार सरकार एक सचिव सहित कुछ पूर्व सचिवों को हिरासत में ले लिया गया है। नेपाल के सबसे बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर भाटभटेनी के मालिक मीन बहादुर गुरूंग भी हिरासत में है। जिन अन्य व्यापारियों के नाम इस घोटाले में शामिल हैं वो सभी फरार हो गए हैं।

error: Content is protected !!