
धमतरी,12 सितंबर ।पहले गांव-गांव से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन होता था। मजदूर घर व गांव छोड़कर महीनों के लिए चले जाते थे, लेकिन जब से मनरेगा व ईंट व्यवसाय गांवों में शुरू हुआ है, तब से 95 प्रतिशत परिवारों का पलायन रूक गया है। पांच प्रतिशत परिवार ही बड़े शहरों और दूसरे प्रांतों में रोजी-रोटी कमाने पलायन हो रहे हैं। ऐसे परिवारों का रिकार्ड ग्राम पंचायतों में एंट्री होता है, लेकिन शासन स्तर पर जिलेभर से पलायन करने वाले मजदूरों की जानकारी उपलब्ध नहीं है, जो चिंता का विषय है। बेलरगांव तहसील में इस साल कम बारिश से सूखे की स्थिति है, ऐसे में इस क्षेत्र से मजदूरों के पलायन होने की आशंका है।
जिले के धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी ब्लाक में कुल 370 ग्राम पंचायतें है। इनमें से वनांचल व मैदानी गांवों के 10 से 15 प्रतिशत ग्रामीण मजदूरी की किल्लत व अभाव के चलते ईंट बनाने व रोजी मजदूरी करने बड़े शहरों व दूसरे जिलों के लिए पलायन होते थे। पलायन का सिलसिला नवंबर माह से शुरू हो जाता था। नगरी व मगरलोड ब्लाक के ग्रामीण ज्यादातर पलायन होते थे, क्योंकि वनांचल क्षेत्र होने की वजह से वहां काम के लाले थे। अब गांव-गांव में ईंट व्यवसाय शुरू हो चुका है। शासन स्तर से मनरेगा कार्य जारी है, ऐसे में ग्रामीणों को घर बैठे काम मिल जाता है। सीजन में ग्रामीण अन्य कार्य कर लेते हैं।
धमतरी शहर से लगे ग्राम लोहरसी, खरतुली, परसतराई, पोटियाडीह, मुजगहन, रत्नाबांधा, श्यामतराई, खरेंगा, भानपुरी, खपरी समेत 20 से 25 किलोमीटर दूर गांवों के ग्रामीण काम करने शहर पहुंचते हैं। ग्रामीणों को यहां मकान निर्माण, दुकान, कई फैक्ट्री, राईसमिलों व अन्य जगह आसानी से काम मिल जाता है। यही वजह है कि अब जिले के सिर्फ पांच प्रतिशत ग्रामीण ही बड़े शहरों में काम करने के उद्देश्य से पलायन होते हैं, जबकि 95 प्रतिशत पलायन गांवों से रूक चुका है।
उल्लेखनीय है कि जिले में करीब दो लाख परिवारों के पास बीपीएल राशनकार्ड है। जिले के बेलरगांव तहसील में इस साल काफी कम बारिश हुई है। क्षेत्र के ग्राम घुरावड़, बरबांधा समेत कई गांवों में धान फसल बारिश नहीं होने से मर रही है। कई किसानों ने तो धान फसल ही नहीं लगाया। ऐसे में किसान व मजदूरों के पास काम नहीं है। केवल 20 प्रतिशत किसानों के पास ही बोर सिंचाई सुविधा है। खेती-किसानी व अन्य काम नहीं होने से क्षेत्र के ग्रामीण गांवों में मनरेगा कार्य शीघ्र खोलने की मांग की है, नहीं तो रोजी-रोटी के लिए पलायन करने की जानकारी शासन-प्रशासन को दिए है।

