
कानपुर, 20 अगस्त । मोतीझील परिसर में सात दिवसीय शुरू हुई शिव महापुराण कथा सुनाने रविवार को पहुंचे देवकी नंदन ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि औरंगजेब ने 1960 में मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़ा था और वहां की मूर्तियों को आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवा दिया था। बनारस ज्ञानवापी की तरह मथुरा से आगरा की जामा मस्जिद तक जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायालय से प्रार्थना है कि आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों से लेकर मथुरा के द्वारका तक ज्ञानवापी की तरह जांच कराई जाय। उन्होंने यह भी कहा कि सीढ़ियों में अगर हमारे छवि नहीं निकलते हैं, तो क्षति होने वाला नुकसान की भरपाई हम करेंगे। कोई भी सनातनी भगवान का अपमान नहीं सह सकता इसलिए हम भी अपमान नहीं सहेंगे।
उन्होंने कहा यह बात हम नहीं कह रहे हैं, मुस्लिम इतिहासकार ने खुद लिखा है। इसके अतिरिक्त कई इतिहास की किताबों में भी इसका जिक्र है। जिसका प्रमाण मजार-ए-आलम ने अपनी किताब में भी किया है।
उन्होंने कहा कि हम भाईचारे की बात करना चाहते हैं, लेकिन अपने भगवान का अपमान नहीं देख सकते। कोई भी सनातनी अपमान नहीं सहेगा। उन्होंने कहा कि सीढ़ियों की जांच कराई जाए अगर केशव देव जी की मूर्ति निकलती है, तो हमें सौंप दें, अगर नहीं निकलेगी तो होने वाला सारा नुकसान हम देंगे। उन्होंने कहा की जो राम का नहीं वो हमारे किसी काम का नहीं। ज्ञानवापी मामले में उन्होंने का कि शिव के आलावा किसी को ज्ञानवापी नहीं कहा गया है। सवाल करते हुए कहा कि इस्लाम में ज्ञानवापी शब्द का जिक्र कहाँ किया गया है।

