एडीए का गिरदावर 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा
अजमेर, 14 जून । भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अजमेर विकास प्राधिकरण के गिरदावर को प्रवीण तत्ववेदी को परिवादी सुभाष नामक युवक से जमीन के नियमन के मामले में 20 हजार रुपए रिश्वत राशि लिए जाने के आरोप में रंगेहाथों पकड़ लिया।

आरोपित गिरदावर प्रवीण तत्ववेदी के खिलाफ एसीबी ने कार्रवाई तब की जब एक रात पहले ही अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गिरधर को राज्य सरकार ने निलम्बित किया है। आयुक्त पर एक होटल रेस्टोरेंट के कर्मचारियों के साथ रात के अंधेरे में मारपीट करने व अपने अधिकारी होने के पद का रुआब डाल कर गेगल पुलिस द्वारा भी मारपीट कराने व रिपोर्ट दर्ज नहीं होने देने का आरोप है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस तरह की वारदातों को गंभीरता से लेते हुए इसे चुनावी वर्ष में सरकार की छवि खराब करने वाला माना है और होटल कर्मचारियों से मारपीट की जांच एडीजी विजिलेंस को सौंप दी है।
एसीबी के अधिकारी समीर कुमार ने बताया कि गिरदावर प्रवीण तत्ववेदी को पकड़ कर एसीबी कार्यालय लाया गया है उनसे आगे पूछताछ चल रही है। आरोपित के घर व अन्य ठिकानों पर भी तलाशी चल रही है। आरोप है कि परिवादी सुभाष की जमीन नियमन की फाइल पर गिरदावर आनाकानी कर रहा था व फाइल अटका रखी थी। शिकायत एसीबी के पास पहुंचने पर उसकी जांच कर पुष्टि की गई है। इसके बाद आरोपित को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया और उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया। एसीबी इस मामले में भी जांच कर रही है कि रिश्वत राशि में किसी अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी का हिस्सा बांट था अथवा नहीं ।
मामले में आगे अंनुसंधान जारी है।
गौरतलब है कि एक रात पूर्व ही राजस्थान के अजमेर जिले में एक होटल कर्मचारी को पीटने के आरोप में एक आईएएस और आईपीएस अधिकारी समेत पांच सरकारी कर्मचारियों को राजस्थान सरकार ने निलंबित कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की जांच एडीजी विजिलेंस को सौंप दी गई है। निलंबित किए गए लोगों की पहचान अजमेर विकास प्राधिकरण के कमिश्नर गिरधर(आईएएस), गंगापुर सिटी पुलिस के स्पेशल ड्यूटी अधिकारी सुशील कुमार बिश्नोई(आईपीएस), पटवारी नरेंद्र सिंह दहिया, कांस्टेबल मुकेश कुमार और एलडीसी हनुमान प्रसाद चौधरी के रूप में हुई है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह घटना सामने आई थी। इस वीडियो में कुछ लोग एक होटल के कर्मचारियों को पीटते हुए नजर आ रहे है। यह घटना 11 जून की रात की बताई जा रही है, जिसके बाद मामले की जांच एक सीनियर पुलिस अधिकारी को सौंप दी गई। होटल मैनेजमेंट ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि एक आईपीएस अधिकारी ने तीन-चार पुलिसकर्मियों के साथ सोमवार देर रात होटल कर्मियों के साथ मारपीट की। जिले के गेगल थाने में पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ होटल कर्मियों से मारपीट करने का मामला दर्ज किया गया है।
विचारणीय है कि इस मामले में पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद भी गौर नहीं किए जाने पर राजपूत समाज के लोग एकजुट हुए और उन्होंने अजमेर से विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक तथा राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी कहे जाने वाले आरटीडीसी चेयमैन धर्मेन्द्र सिंह राठौड़ को इसकी शिकायत की। बताया जाता है कि शिकायत के अगले दस घंटों के दरमयान ही राज्य सरकार का एक्शन सामने आ गया। आईएएस और आईपीएस दोनों ही अधिकारी यद्यपि प्रभावशाली लोबिंग रखते थे पर निलम्बित कर दिए गए। साथ में अजमेर जिला पुलिस प्रशासन पर भी गाज गिरने का अंदेशा बना हुआ है। क्यों राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भ्रष्टाचार और असुरक्षा जैसी घटनाओं को प्रदेश सरकार की चुनावी वर्ष में छवि खराब करने के दृष्टिकोण से गंभीरता से ले रहे हैं। पहले ही सरकार की छवि पेपर लीक प्रकरण में धूमिल हो रखी है।
अजमेर विकास प्राधिकरण पर पूर्व में भी भ्रष्टाचार निरोधक विभाग की तिरछी नजर बनी रही है। प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेन शाहनी भगत हो या प्राधिकरण के अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार निरोधक विभाग की यहां निरतंर धर- पकड़ होती रही है। यही वजह है कि राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विगत पांच साल में अजमेर विकास प्राधिकरण में किसी भी स्तर पर कोई राजनीतिक नियुक्तियां नहीं की। कांग्रेस कार्यकर्ता एडीए बोर्ड में सदस्य और चेयरमैन बनने के लिए तरसते ही रह गए।

